रामायण में एक योद्धा ऐसा भी था जिससे रावण तो किया स्वम श्री राम भी भयभीत थे

दोस्तों रामायण तो आप सभी ने देखी होगी! रामायण में प्रभु श्री राम का जन्म से लेकर आखरी तक का पूरा वर्णन किया गया है! जहां एक तरफ श्री विष्णु अवतार प्रभु श्री राम का वर्णन है वही दूसरी ओर रावण का भी वर्णन किया गया है! कहां जाता है रावण को सभी वेदों का ज्ञान था जिससे वह समस्त संसार पर विजय हासिल कर पाया! लेकिन उसकी एक गलती ने उसे इस संसार से दूर कर दिया! आपने पूरी रामायण देखने के बाद क्या एक बात गौर की है! रामायण में एक योद्धा ऐसा भी था जिसके समक्ष जाने में हर कोई घबराता था!

जी हां हम आज आपको उसी एक योद्धा के बारे में बताएंगे! वैसे तो आपको पता ही है प्रभु श्री राम विष्णु अवतार है! लेकिन प्रभु श्री राम जी उस योद्धा के सामने कभी नहीं गए! क्योंकि श्रीराम भी जानते थे कि मैं भी उस योद्धा से आमने-सामने की लड़ाई मैं नहीं जीत सकता! हां यह बात अलग है कि वह भगवान का अवतार है और भगवान के सामने किसी की भी नहीं चलती! परंतु यह उन्होंने खुद सिद्ध कर दिया था कि वह उनके सामने की लड़ाई नहीं कर सकते!

हम बात कर रहे हैं बाली की! महाबली बाली शास्त्रों के अनुसार महाबली बाली ही एक ऐसा योद्धा था जिस ने रावण को भी अपनी पूजते बांधकर इधर-उधर घुमा दिया! खुद रावण भी अपने आप को महाबली बाली के सामने कमजोर महसूस करता था!

दरअसल महाबली बाली को वरदान प्राप्त था कि जो भी उसके समक्ष उससे युद्ध करेगा उसकी आदि शक्ति बाली के अंदर आ जाएगी! जिसके चलते उस को हराना नामुमकिन सा था!

जब सुग्रीव श्री राम से मिली तो उन्होंने महाबली बाली से बचने के लिए श्रीराम से मदद मांगी! सुग्रीव को तो मालूम था कि वह वाली से कभी नहीं जीत पाएगा! और इस बात का अंदाजा प्रभु श्री राम को भी था कि उसको वरदान प्राप्त है कि जो उसके समक्ष जाएगा उसकी आदिशक्ति उसके शरीर में आ जाएगी! ऐसे में प्रभु श्री राम ने सुग्रीव से कहा- तुम जाओ और बाली को युद्ध के लिए आह्वान दो! ऐसे में जब बाली को सुग्रीव ने युद्ध के लिए पुकारा तो बाली अपने आप को नहीं रोक पाया!

बाली और सुग्रीव में युद्ध शुरू हुआ तो प्रभु श्रीराम एक पेड़ के पीछे से उसी को देख रहे थे! तब मौका पाकर प्रभु श्री राम ने अपने बांध से बाली की मृत्यु की! अन्यथा अगर भगवान श्रीराम भी आमने-सामने की लड़ाई मैं शामिल होते तो शायद श्री राम को भी हार का मुंह देखना पड़ सकता था! लेकिन वह भगवान थे उनको सब कुछ मालूम था इसीलिए उन्होंने पेड़ के पीछे से छल से महाबली बाली का वध किया था!

दोस्तों ऐसे बहुत से उदाहरण है जिनको सामने से नहीं मारा जा सकता था लेकिन उनकी करनी का फल देना भी जरूरी था! ठीक ऐसे ही महाभारत में पितामह भीष्म, आचार्य गुरु द्रोण और अंगराज कर्ण यह से महारथी थे जो हर किसी पर भारी थे! जो अपने बानो समस्त संसार पर विजय प्राप्त कर सकते थे! लेकिन इनके कर्मों काफल तो इन्हें देना ही था इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने छल से इनका वध करवाया था!

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